सर्व शिक्षा अभियान|sarva shiksha abhiyan in hindi


सर्व शिक्षा अभियान|sarva shiksha abhiyan in hindi

दोस्तों आज हम आपको बताने जा रहे हैं सर्व शिक्षा अभियान के बारे में सर्व शिक्षा अभियान एक ऐसा अभियान है जिसके अंतर्गत शिक्षा के स्तर को सुधारना मुख्य उद्देश्य है|शिक्षा में बालक-बालिका एवं सामाजिक श्रेणी के अंतरों को दूर करने तथा अधिगम की गुणवत्‍ता में सुधार हेतु विविध अंत:क्षेपों में अन्‍य बातों के साथ-साथ नए स्‍कूल खोला जाना तथा वैकल्पिक स्‍कूली सुविधाएं प्रदान करना, स्‍कूलों एवं अतिरिक्‍त कक्षा-कक्षों का निर्माण किया जाना, प्रसाधन-कक्ष एवं पेयजल सुविधा प्रदान करना, अध्‍यापकों का प्रावधान करना, नियमित अध्‍यापकों का सेवाकालीन प्रशिक्षण तथा अकादमिक संसाधन सहायता, नि:शुल्‍क पाठ्य-पुस्‍तकें एवं वर्दियां तथा अधिगम स्‍तरों/परिणामों में सुधार हेतु सहायता प्रदान करना शामिल है

सभी व्यक्ति को अपने जीवन की बेहतरी का अधिकार है। लेकिन दुनियाभर के बहुत सारे बच्चे इस अवसर के अभाव में ही जी रहे हैं क्योंकि उन्हें प्राथमिक शिक्षा जैसे अनिवार्य मूलभूत अधिकार भी मुहैया नहीं कराई जा रही है।

सर्व शिक्षा अभियान क्या है?

  • राष्‍ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा, 2005 यथा व्‍याख्‍यायित शिक्षा का सम्‍पूर्ण दृष्टिकोण और पाठ्यक्रम, शिक्षक शिक्षा, शैक्षिक योजना और प्रबंध के लिए उल्‍लेखनीय निहितार्थों के साथ सम्‍पूर्ण सामग्री और शिक्षा के प्रोसेस के क्रमबद्ध पुनरूद्धार के निहितार्थ।
  • साम्‍यता का अर्थ न केवल समान अवसर अपितु ऐसी स्थितियों का सृजन है जिनमें समाज के अपहित वर्गों- अ.जा.,अ.ज.जा.,मुस्लिम अल्‍पसंख्‍यक, भूमिहीन कृषि कामगारों के बच्‍चे और विशेष जरूरत वाले बच्‍चे आदि – अवसर का लाभ ले सकते हैं।
  • पहुंच यह सुनिश्चित करने के लिए सीमित नहीं होनी चाहिए कि विनिर्दिष्‍ट दूरी के अंदर सभी बच्‍चे स्‍कूल पहुंच योग्‍य हो जाएं परंतु इसमें पारम्‍परिक रूप से छोड़ी गई श्रेणियों- अ.जा.,अ.ज.जा. और अ‍त्‍यधिक अपहित समूहों के अन्‍य वर्गों मुस्लिम अल्‍पसंख्‍यक, सामान्‍य रूप से लड़कियां और विशेष जरूरतों वाले बच्‍चों की शैक्षिक जरूरतों और दुर्दशा को समझना निहित है।
  • बालक-बालिका सोच, न केवल लड़कों के साथ लड़कियों को बराबर करने का प्रयास है, अपितु शिक्षा पर राष्‍ट्रीय नीति 1986/92 में बताए गए परिप्रेक्ष्‍य में शिक्षा को देखना अर्थात महिलाओं की स्थिति में बुनियादी परिवर्तन लाने के लिए निश्‍चायक हस्‍तक्षेप।
  • उनको अभिनव परिवर्तन और कक्षा में और कक्षा से दूर संस्‍कृति के सृजन के लिए प्रोत्‍साहित करने के लिए शिक्षक की केन्‍द्रीयता जो बच्‍चों, विशेष रूप से उत्‍पीडि़त और उपेक्षित पृष्‍ठभूमि से लड़कियों के लिए समावेशी परिवेश पैदा कर सकती है।
  • आरटीई अधिनियम के माध्‍यम से अभिभावकों, अध्‍यापकों, शैक्षिक प्रशासकों और अन्‍य हिस्‍सेदारों पर दण्‍डात्‍मक प्रक्रियाओं पर बल देने की बजाए नैतिक बाध्‍यताएं लगाना।
  • शैक्षिक प्रबंध की अभिसारी और एकीकृत प्रणाली आरटीई कानून के कार्यान्‍वयन के लिए पूर्व-अपेक्षा है। सभी राज्‍यों को उस दिशा में उतनी तेजी से बढ़ना है जितना व्‍यवहार्य हो।

सर्व शिक्षा अभियान में ग्राम शिक्षा समिति की भूमिका

सर्व शिक्षा अभियान सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है। सर्व शिक्षा अभियान के घोषित लक्ष्य के अनुसार एक निश्चित समय सीमा के अन्दर सभी बच्चों का शत–प्रतिशत नामांकन, ठहराव तथा गुणवत्तता युक्त प्रांरभिक शिक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही सामाजिक विषमता तथा लिंग भेद को भी दूर करना है।

ग्राम शिक्षा समिति का संगठनात्मक स्वरुप

ग्राम शिक्षा समिति ग्राम स्तर पर गठित एक छोटा संगठनात्मक ईकाई है जो खासकर प्राथमिक शिक्षा के प्रसार के प्रति समर्पित है। यह समिति 15 या 21 सदस्यों का एक संगठन है जिसका गठन प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय एवं प्राथमिक कक्षा युक्त मध्य विद्यालय के लिए किया जाता है। सम्बन्धित विद्यालय के प्रधानाध्यापक ही इस समिति के पदेन सचिव होते हैं।

ग्राम शिक्षा समितिअनु.ज.जा.वर्गमहिला वर्गअन्य वर्ग
प्रावधान(कुल सदस्यों का कम से कम आधा अनु.ज.जा )(कुल सदस्यों का कम आधा से कम एक तिहाईमहिला)(कुल सदस्यों का कम आधा से कम एक तिहाई अन्य)
(क) कुल 15 सदस्यपुरुष-5
महिला – 3
महिला-5 (अनुसूचित जनजाति वर्ग की 3 महिला सदस्य मिलाकर)1+4
(ख) कुल 21 सदस्यपुरुष-6
महिला – 5
महिला-7 (अनुसूचित जनजाति वर्ग की 5 महिला सदस्य मिलाकर)1+6

दोस्तों यदि आप सर्व शिक्षा अभियान से संबंधित कोई भी जानकारी पूछना चाहते हैं तो कमेंट कर सकते हैं हमारे फेसबुक पेज को लाइक और शेयर जरूर करें|

2 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.