क्या है नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति | New Education Policy 2020 in Hindi (PDF)


    नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

    केंद्र सरकार ने एक बहुत ही बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लेकर नई शिक्षा नीति 2020 (NEP) को बुधवार को मंजूरी दे दी है। इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत स्कूली शिक्षा व उच्च शिक्षा में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। यह घोषणा मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल एवं आईबी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा की गई है। इस नीति के अंदर अब केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) का नाम बदल कर  शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) कर दिया गया है। अब उच्च शिक्षा के लिए यह एक ही रेगुलेटरी बॉडी होगी ताकि शिक्षा के क्षेत्र में अव्यवस्था ख़त्म की जा सके।

    New Education Policy (NEP) in Hindi

    इस नई नीति के जरिए शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाने की अपेक्षा है। स्कूलों में 10+2 के पाठ्यक्रम की जगह अब 5+3+3+4 का पाठ्यक्रम चलेगा। छात्रों पर से बोर्ड की परीक्षाओं का भार कम होगा। शिक्षा पर खर्च होने वाले 4.43 फीसदी जीडीपी के बदले अब 6 फ़ीसदी जीडीपी खर्च किया जाएगा।

    New Education Policy 2020 (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) – प्रमुख बिंदु

    1. इस फॉरमैट के चलते स्कूल के पहले पांच साल आते हैं जिसमें प्री स्कूल के तीन साल और पहली और दूसरी कक्षा के दो साल शामिल हैं। यह फाउंडेशनल स्टेज कहलाया जाएगा। इन पांच सालों की पढ़ाई के लिए सरकार ने एक नए पाठ्यक्रम को लागू करने का फैसला लिया है। बच्चे 6 साल की उम्र से पहली कक्षा की पढ़ाई शुरू कर सकते हैं।
    2. इसके बाद के 3 साल प्रेपरेटरी स्टेज केहलाया जाएगा जिसमे 3-5 की कक्षाएं शामिल हैं। 
    3. आगे के 3 साल मिडिल स्टेज कहलाये जायेंगे जिसमें 6 से 9 तक की कक्षाएं शामिल हैं। छठी कक्षा से ही अब छात्रों को प्रोफेशनल स्किल्स की शिक्षा दी जाएगी। 
    4. चौथा स्टेज कक्षा नवमी से बारहवीं तक होगा। इसके अंतर्गत छात्रों को अपने मनपसंद विषय चुनने की पूरी आजादी होगी। छात्र चाहे तो विज्ञान और गणित के साथ फैशन डिजाइनिंग भी पढ़ सकते हैं। इससे पहले कक्षा 1 से 10 तक सामान्य पढ़ाई होती थी और विषय चुनने का अवसर कक्षा ग्यारहवीं से प्राप्त होता था। 
    5. इसी के साथ-साथ छात्रों को सभी विषयों में दो स्तर का विकल्प दिया जाएगा। जिस प्रकार सीबीएसई ने इस बार गणित में दो स्तर रखे थे- बेसिक और स्टैंडर्ड, उसी प्रकार सभी विषयों में दो स्तर रखे जाएंगे जिनमें से छात्र कोई भी विकल्प चुन सकते हैं।
    6. बोर्ड परीक्षाओं को सरल बनाने का भी फैसला किया गया है। इन परीक्षाओं के द्वारा कोर कंपिटेंसी की परख की जाएगी। यह परीक्षाएं साल में दो बार ऑब्जेक्टिव एवं  सब्जेक्टिव पैटर्न में ली जाएंगे। छात्र इनमें से कोई भी विकल्प चुन सकते हैं। 
    7. नई शिक्षा नीति के अंतर्गत पांचवी कक्षा तक पढ़ाई मातृभाषा में होगी और जहां संभव है, पढ़ाई आठवीं कक्षा तक मातृभाषा में होगी।
    New Education Policy

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति (New Education Policy) से क्या बदलाब आ सकते हैं?

    1. नई शिक्षा नीति के अनुसार अब कॉलेज एवं यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए अमेरिका के SAT की परीक्षा की तरह एक कॉमन एंट्रेंस टेस्ट लिया जाएगा। देश के विभिन्न कॉलेजों में एडमिशन के लिए एक कॉमन कॉलेज एंट्रेस एग्जाम साल में दो बार होगा। 
    2. बैचलर डिग्री तीन या चार साल की होगी और मास्टर्स डिग्री एक या दो साल की होगी। 
    3. बैचलर डिग्री में चार स्तर होंगे। पहले स्तर को पूरा करने पर सर्टिफिकेट, दूसरे स्टार्ट को पूरा करने पर एडवांस्ड डिप्लोमा, तीसरे स्तर को पूरा करने पर बैचलर की डिग्री और चौथे स्तरको पूरा करने पर रिसर्च के साथ बैचलर डिग्री पूरी करने का मौका होगा। 
    4. मरस्टर्स की डिग्री के पश्चात एमफिल का कोर्स नहीं होगा। सीधे पीएचडी में दाखिला ले सकते हैं। 

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    एक रेगुलेटरी बॉडी का निर्माण

    नई शिक्षा नीति के अनुसार अब UGC, AICTE, NCTE की मान्यता ख़त्म हो जाएगी। उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने बताया उच्च शिक्षा में UGC, AICTE और NCTE की जगह केवल एक नियामक संस्था की स्थापना की जाएगी। कॉलेजों को स्वायत्ता देकर 15 वर्षों में विश्वविद्यालय से संबद्धता की प्रक्रिया को खारिज किया जाएगा। खरे ने यह भी बताया कि कॉलेजों में ऑनलाइन स्वत: घोषणा के आधार पर मंजूरी दी जाएगी जिसके चलते इंस्पेक्टर राज ख़त्म होगा। कॉलेजों द्वारा ली जाने वाली फीस पर भी नियंत्रण रखा जाएगा।

    पूछे गए सवाल

    क्या सभी विषयों की पढ़ाई मातृभाषा में ही होगी?

    अंग्रेज़ी, हिंदी एवं संस्कृत का विकल्प रखते हुए मातृभाषा में अधिकतम विषयों की पढ़ाई पांचवी क्या आठवीं कक्षा तक होगी।

    क्या एमफिल की जगह किसी और कोर्स की घोषणा होगी?

    नहीं, आप मास्टर्स के बाद सीधे पीएचडी के लिए आवेदन भार सकेंगे।

    स्कूल में बच्चों का आकलन कैसे होगा?

    स्कूल में बच्चों का आकलन तीन स्तर पर होगा। एक छात्र खुद करेगा, दूसरा सहपाठी और तीसरा शिक्षक करेगा।

    B.Ed कितने वर्षों का होगा?

    B.Ed का कोर्स 4 वर्षों का होगा।