नमामि गंगे योजना|namami gange yojana in hindi


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दोस्तों जैसा कि आप सभी जानते हैं हम आपको अपनी वेबसाइट पर हर एक सरकारी योजना की पूरी जानकारी देने की कोशिश करते हैं ताकि आप सरकार की तरफ से चल रही सभी सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठा सकें दोस्तों आज हम आपके लिए एक और सरकार की तरफ से चल रही नमामि गंगे योजना के बारे में बताने जा रहे हैं|

ताकि आपको भी पता चले कि नमामि गंगे योजना क्या है? और यह किस प्रकार से काम कर रही है नमामि गंगे योजना की पूरी जानकारी लेने के लिए हमारे इस आर्टिकल को पूरा ध्यान से पढ़ें और देखें कि नमामि गंगे प्रोजेक्ट क्या है यह प्रोजेक्ट किस प्रकार से काम कर रहा है|

नमामि गंगे प्रोजेक्ट क्या है?

सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए ‘नमामि गंगे’ नामक एक एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन का शुभारंभ किया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नदी की सफाई के लिए बजट को चार गुना करते हुए पर 2020-2020 तक नदी की सफाई पर 20,000 करोड़ रुपए खर्च करने की केंद्र की प्रस्तावित कार्य योजना को मंजूरी दे दी और इसे 100% केंद्रीय हिस्सेदारी के साथ एक केंद्रीय योजना का रूप दिया।

शुरूआती स्तर की गतिविधियों के अंतर्गत नदी की उपरी सतह की सफ़ाई से लेकर बहते हुए ठोस कचरे की समस्या को हल करने; ग्रामीण क्षेत्रों की सफ़ाई से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की नालियों से आते मैले पदार्थ (ठोस एवं तरल) और शौचालयों के निर्माण; शवदाह गृह का नवीकरण, आधुनिकीकरण और निर्माण ताकि अधजले या आंशिक रूप से जले हुए शव को नदी में बहाने से रोका जा सके, लोगों और नदियों के बीच संबंध को बेहतर करने के लिए घाटों के निर्माण, मरम्मत और आधुनिकीकरण का लक्ष्य निर्धारित है।

नमामि गंगे प्रोजेक्ट की 231 योजनाओं में गंगोत्री से शुरू होकर हरिद्वार, कानपुर,  इलाहाबद , बनारस , गाजीपुर , बलिया , बिहार में 4 और बंगाल में 6 जगहों पर पुराने घाटों का जीर्णोद्धार, नए घाट, चेंजिंग रूम, शौचालय, बैठने की जगह, सीवेज ट्रीटमेंट प्लान्ट, आक्सीडेशन प्लान्ट बायोरेमेडेशन प्रक्रिया से पानी के शोधन का काम किया जाएगा।  इसमें गांव के नालों को भी शामिल किया गया है।  साथ ही तालाबों का गंगा से जुड़ाव पर क्या असर होता है उसे भी देखा जाएगा। 

गंगा की कुल लम्बाई 2525 किलोमीटर की है। गंगा का बेसिन 1. 6 मिलियन वर्ग किलोमीटर का है , 468. 7 बिलियन मीट्रिक पानी साल भर में प्रवाहित होता है जो देश के कुल जल श्रोत का 25. 2 प्रतिशत भाग है। इसके बेसिन में 45 करोड़ की आबादी बसती है। साथ ही गंगा पांच राज्यों से होकर गुजरती है।  इसे राष्ट्रीय नदी भले ही घोषित किया गया हो पर यह राज्यों की मर्जी से ही बहती है। 

गंगा परियोजना के तथ्य

परियोजना की लागत2037 करोड़ रुपये
परियोजना में शामिल मंत्रालयकेंद्रीय जलसंसाधन मंत्रालय, नदी विकास और गंगा कायाकल्प
परियोजना का उद्देश्यगंगा नदी की सफाई
परियोजना प्रारंभ तिथिजुलाई 2014
परियोजना की अवधि18 साल

नमामि गंगे योजना के लाभ

  • 32 परियोजनाओं में से 871.74 करोड़ रुपए की कुल लागत वाली 20 परियोजनाएँ सीवर शोधन तथा उत्तराखंड के विभिन्‍न भागों में आधारभूत संरचना के निर्माण से संबंधित हैं। 
  • छह परियोजनाएँ हरिद्वार में लागू की जाएंगी। इसके अंतर्गत जगजीतपुर और सराय में दो एसटीपी का निर्माण किया जाएगा। हरिद्वार की परियोजनाओं की कुल लागत 414.20 करोड़ रुपए है।
  • सभी परियोजनाओं के पूरे होने के बाद हरिद्वार और ऋषिकेश समेत उत्तराखंड के सभी प्रमुख शहरों का पानी बिना शोधित हुए गंगा में नहीं जाएगा। 
  • इसके अतिरिक्‍त उत्तरकाशी, मुनि की रेती, कीर्ति नगर, श्रीनगर, रुद्र प्रयाग, बद्रीनाथ, जोशीमठ, चमोली, नंद प्रयाग और कर्ण प्रयाग में सीवेज शोधन परियोजनाओं की आधारशिलाएँ रखी गईं।
  • टिहरी गढ़वाल, रुद्र प्रयाग और चमोली में घाट विकास कार्यों के लिये आधारशिलाएं रखी गईं। 

Namami Gange Project का कवर क्षेत्र|

भारत के पांच राज्य Namami Gange Project इम्प्लेमेंट किया गया है| 

  • उत्तराखंड|
  • झारखंड|
  • उत्तरप्रदेश|
  • पश्चिम बंगाल|
  • बिहार|

गंगा नदी के पथ में आते हे,और इसके बजाये सहायक नदियों के कारण वे निचे दिए मुजब state कुछ हिस्सों को भी छूता हे|

  • हिमाचल प्रदेश
  • राजस्थान 
  • हरियाणा
  • छत्तीशगढ़ और
  • दिल्ही

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