लघु और सीमान्त किसान | भारत में किसानों की तीन श्रेणियां : लघु, सीमान्त और वृहद

किसानों को लेकर अक्सर नई नई योजनाएं केंद्र सरकार या राज्य सरकारें लाती ही रहती है। किसान हमारे देश का वह महत्वपूर्ण तबका है जो पुरे देश की जनता को खाने पीने की सामग्री मुहैया कराता है। यही कारण है कि किसानों के अक्सर कर्ज माफी से लेकर सस्ते कीटनाशक, खाध और बाकि मशीनों पर सब्सिडी दी जाती है। लेकिन आपने अक्सर सुना होगा कि सरकार लघु किसानों और सीमांत किसानों को ही योजना का लाभ पहुंचाएगी। पर आखिर क्यों ज्यादातर योजनाओं का लाभ केवल इन्ही किसानों को मिलता है और होते कौन हैं लघु किसान और सीमांत किसान। अगर आप भी इस सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो हम आपको बताते हैं। सम्पूर्ण जानकारी के लिए इस लेख को अवश्य पढ़ें

लघु और सीमान्त किसान कौन होते हैं

भारत में किसानो को तीन श्रेणी में रखा गया है।

  1. लघु किसान
  2. सीमांत किसान
  3. वृहद किसान

सीमांत किसान किसे कहते हैं?

सबसे पहले बात करते हैं सीमांत किसानों की। तो अगर सरकार की नजर से इसे देखें तो सीमांत किसान वह किसान होते हैं जिनके पास खेती के लायक जमीन केवल एक हेक्टेयर यानी करीब ढाई एकड़ होती ही है, इन्हे ही सीमांत किसान माना जाता है। आपको बता दें बीते समय में कृषि जनगणना के मुताबिक किसानों की कुल आबादी का 68 फीसदी हिस्सा सीमांत किसानों का ही पाया गया था। इस कृषि जनगणना के अनुसार ज्यादातर किसानों के पास केवल 0.38 हेक्टेयर जमीन ही खेती योग्य है।

लघु किसान किसे कहते हैं?

इसके बाद आते हैं लघु किसान। लघु किसान वह किसान होते हैं जिनके पास खेती करने योग्य भूमि केवल एक हेक्टेयर से ज्यादा और 2 हेक्टेयर से कम होती है। जिन किसानों के पास पांच एकड़ से कम जमीन होती है उन्हे ही लघु किसान कहा जाता है। 2010-2011 कृषि जनगणना के अनुसार देखा जाए तो इन किसानों की संख्या केवल 10 फीसदी ही है

कौन से किसान वृहद किसान कहलाते हैं

अंत में आते हैं वृहद किसान जिन्हे बड़े जमींदार के नाम से भी जाना जाता है। जिन किसानों के पास 10 हेक्टेयर या उससे अधिक जमीन कृषि योग्य होती है उन्हे ही वृहद किसान कहा जाता है। किसान जनगणना के अनुसार इनकी संख्या कुल 4.98 फिसदी है। वंही देश में ऐसे बहुत से किसान हैं जिनके पास 4 हेक्टेयर से लेकर 10 से हेक्टेयर से कम कृषि योग्य भूमि है।

सरकार के सामने चुनौती

हमारे देश में सीमांत किसानों की बढ़ती संख्या सरकार के लिए सिर दर्द का विषय बनती जा रही है। आज देश में लगभग 80 फिसदी से ज्यादा किसान लघु और सीमांत किसान है। अगर सीमांत किसानों की संख्या बढती रही यानी अगर इनकी कृषि योग्या भूमि इसी तरह घटती रही तो सरकार के लिए एक नई चुनौती उभर कर सामने आ खड़ी होगी। ऐसे में सरकार के लिए सबसे बड़ी समस्या यह होगी कि आखिर इन सभी सीमांत किसानों और लघु किसानों तक सभी योजनाओं का लाभ कैसे पहुंचाया जाए। बैरहाल हम अक्सर कहते हैं कि हमारा देश कृषि प्रधान देश है और यह सच भी है लेकिन हमारा देश लघु किसान और सीमांत किसानो का देश है जो अपने परिवारों को जरूरी सुविधाएं भी मुहैया नहीं करा पाते।

सम्बंधित प्रश्न और उत्तर

सरकार द्वारा किसानों की कितनी और कौन कौन सी श्रेणियां हैं?

भारत में किसानों की तीन श्रेणियां हैं : लघु, सीमान्त और वृहद

वृहद किसानों को और किस नाम से जाना जाता है

इन किसानों को जमींदार के नाम से भी जाना जाता है

लघु और सीमान्त किसानों का नाम बार बार सुनने में क्यों आता है?

किसान उत्थान की बहुत सी योजनाएं छोटे किसानों यानी लघु और सीमान्त किसानों के लिए ही होती हैं । इसीलिए इन किसानों का जिक्र अक्सर होता है|

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