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स्वयं सहायता समूह kya hota hai? What is Self Help group (SHG) in Hindi

अगर आप भी स्वयं सहायता समूह के बारे में जानना चाहते हैं तो इस आर्टिकल में आपको इसके बारे में सारी जानकारी दी जायेगी | आईये समय बर्बाद न कर के सीधे मुद्दे पर आएं |

स्वयं सहायता समूह या Self Help Group (SHG) क्या है?

“स्वयं सहायता समूह” एक छोटा सामुदायिक समूह है जो 10-20 लोगों से मिलकर बनता है। यह समूह लोगों को मदद करने और उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का काम करता है। यहां हम इसे सरल शब्दों में समझेंगे:

  1. बनावट:
    • स्वयं सहायता समूह गाँव में ही बनता है, और इसमें 10-20 लोग होते हैं।
  2. सदस्यता:
    • समूह में सदस्य वही लोग होते हैं जो एक ही गाँव से हैं। यहां अधिकांशत: महिलाएं होती हैं।
  3. लक्ष्य:
    • समूह का मुख्य उद्देश्य यह है कि सदस्य आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत हों।
  4. बचत और ऋण:
    • सदस्य रोजाना थोड़ा पैसा बचता है, और यह पैसा समूह की आपसी मदद के लिए रखा जाता है। उन्हें आवश्यकता होने पर यह पैसा मिलता है।
  5. कौशल विकास:
    • समूह लोगों को यहां बताता है कि वे और भी अधिक कौशल विकसित करें ताकि उन्हें और अच्छा काम मिल सके।
  6. सामाजिक समर्थन:
    • यहां लोग एक दूसरे का साथ देते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं।
  7. सरकारी सहायता:
    • समूह सरकारी योजनाओं के तहत भी काम करता है ताकि सदस्यों को और भी फायदा हो सके।

समग्र रूप से, स्वयं सहायता समूह गाँवों में एक बढ़िया सामूहिक ताकत बनता है जो लोगों की मदद करने और उन्हें सामाजिक रूप से और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद करता है।सरकार द्वारा महिलाओं के लिए Self Help Groups (SHG) ke माध्यम से सरकारी स्कीमों का लाभ पहुँचाया जाता है |

Self Help Group कैसे बनता है?

  1. समूह का चयन:
    • एक समूह बनाएं जिसमें लोगों को समृद्धि प्राप्त करने के इरादे हों। यह समूह आमतौर पर गाँव या यहां तक ​​कि एक ही औरतों के समूह के रूप में बन सकता है।
  2. सदस्य चयन:
    • सदस्यों का चयन करें जो समूह के उद्देश्यों और कार्यक्षेत्रों के साथ मेल खाते हैं।
  3. गठबंधन बनाएं:
    • समूह की स्थापना के लिए गाँव के लोगों के साथ मिलकर सहमति प्राप्त करें।
  4. संगठन बनाएं:
    • समूह को संगठित रूप से बनाएं और सदस्यों का एक सख्त संरचना तय करें।
  5. उद्देश्य तय करें:
    • समूह को उद्देश्य तय करें, जैसे कि बचत करना, ऋण प्रदान करना, और सामूहिक उन्नति हेतु कौशल विकसित करना।
  6. स्वयं सहायता साधने का योजना बनाएं:
    • एक साझेदारी योजना तैयार करें जिसमें बचत, ऋण प्रदान, और कौशल विकास के लिए निर्देश हों।
  7. सदस्यों की प्रशिक्षण:
    • सदस्यों को समृद्धि, बचत, और कौशल विकास के क्षेत्र में प्रशिक्षित करें।
  8. बचत शुरू करें:
    • सदस्यों को नियमित रूप से थोड़ा पैसा बचत करने के लिए प्रेरित करें।
  9. साझेदारी रखें:
    • समूह को बचत का साझेदारी निधि में जमा करने और ऋण प्रदान के लिए एक समझौता बनाएं।
  10. सामूहिक निर्णय लें:
    • समूह को सामूहिक निर्णय लेने के लिए बढ़ावा दें, जिसमें सदस्यों की राय और सुझावों को महत्वपूर्ण बनाया जाता है।
  11. बैंक खाता खोलें:
    • समूह का एक सामूहिक बैंक खाता खोलें ताकि वित्तीय संदेशों को सुझाव दिया जा सके।
  12. सरकार से जुड़ाव:
    • समूह को सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास करें ताकि सदस्यों को और भी लाभ हो सके।

भारत सरकार, विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से, अपने गरीबी उन्मूलन और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के एक हिस्से के रूप में एसएचजी के गठन और कामकाज को सक्रिय रूप से बढ़ावा और समर्थन दे रही है। कुल मिलाकर, स्वयं सहायता समूह विशेष रूप से भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्वतंत्रता, सामाजिक एकजुटता और सामुदायिक विकास को बढ़ावा देने में सहायक रहे हैं।

अगर आप स्वयं सहायता समूह के बारे में सब कुछ विस्तार से जानना चाहते हैं तो यह जरूर पढ़ें |

Last Updated on February 18, 2024 by Hindi Yojana Team

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