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राजस्थान दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना|Deendayal Upadhyaya Varistha Tirth Yojana Rajasthan

  • राजस्थान  दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा|राजस्थान पंडित दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा|| Rajasthan Deendayal Upadhyaya Varistha Tirth Yojana|राजस्थान दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थयात्रा योजना ऑनलाइन अप्लाई एप्लीकेशन फॉर्म

राजस्थान मुख्यमंत्री जी ने राज्य के बुज़ुर्गो के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना का शुभारम्भ किया|राजस्थान दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा का मुख्य उद्देश्य है ताकि बुजुर्गों को भी यात्रा करवाई जाए बहुत से ऐसे बुजुर्ग होते हैं जिनके वासियों को पैसों की कमी होती है यह उनके बच्चे उनको यात्रा पर नहीं लेकर जाते हैं अब उनको इसके लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उनका सपना भी साकार होगा और सब बुजुर्ग यात्रा पर जा सकेंगे राजस्थान सरकार का उद्देश्य है कि सभी बुजुर्गों को एकजुट होकर यात्रा करवाई जाए|

राजस्थान दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा का उद्देश्य

इस योजना का उद्देश्य राजस्थान के मूल निवासी वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष या अधिक आयु के व्यक्ति) को उनके जीवन काल में एक बार प्रदेश के बाहर देश में स्थित विभिन्न नाम निर्दिष्ट तीर्थ स्थानों में से किसी एक स्थान की यात्रा सुलभ कराने हेतु राजकीय सुविधा एवं सहायता प्रदान करना है।

योजना प्रारंभ वर्ष 2017  (मूलतः 2103 से, 2017 से नये स्वरूप में)
तीर्थ यात्रा हेतु अनुदान राशि स्वयं विभाग द्वारा निर्धारित यात्रा का व्यय वहन
योजना में कुल लाभार्थियों की विभागीय सीमा 15,000 रेलमार्ग से।
5000 वायुयान से

राजस्थान दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा स्थानों की सूची:-

यात्रा हेतु तीर्थ स्थान इस प्रकार हैः-
रेल द्वारा:- 
1. जगन्नाथपुरी           2. रामेश्वरम्         3. वैष्णोदेवी        4. तिरूपति
5. द्वारिकापुरी             6. अमृतसर       7. सम्मेदशिखर     8. गोवा
9. श्रावण बेलगोला      10. बिहार शरीफ   11. शिरडी        12. पटना साहिब
13. गया- बोधगया काशी- सारनाथ
हवाई जहाज द्वारा:- 
1. जगन्नाथपुरी           2. रामेश्वरम्       3. तिरूपति
4. वाराणसी (काशी)- सारनाथ   5. अमृतसर       6. सम्मेदशिखर
7. गोवा        8. बिहार शरीफ     9. शिरडी          10. पटना साहिब
नोटः- 
उक्त सूची में देवस्थान विभाग द्वारा और स्थानों को सम्मिलित अथवा कम किया जा सकेगा। 
हवाई यात्रा में कुछ दूर तक बस द्वारा यात्रा भी की जाएगी, जिसका विवरण विज्ञप्ति में किया जाएगा। तीर्थ यात्रा हेतु निर्धारित प्रस्थान स्थल भी विज्ञप्ति में वर्णित होंगे।

राजस्थान दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा यात्रा पर जाने के लिये पात्रता:-

इस योजना के अन्तर्गत आवेदक को निम्नलिखित शर्तें पूर्ण करनी होंगी-

  1. राजस्थान का मूल निवासी हो एवं 60 वर्ष से अधिक आयु का हो। 60 वर्ष या अधिक आयु के व्यक्ति रेल यात्रा हेतु एवं 65 वर्ष या अधिक आयु के व्यक्ति हवाई जहाज से यात्रा के पात्र होगें।
  2. आयकरदाता न हो।
  3. इस योजना के अन्तर्गत पूर्व में यात्रा न किये जाने जाने संबंधी आशय का Self Declaration यात्री को देना होगा। यदि किसी भी समय यह पाया गया कि यात्री द्वारा इस शर्त का उल्लघन किया गया है तो यात्रा पर हुआ सम्पूर्ण व्यय एवं उस पर 25 प्रतिशत राशि दण्डात्मक देय होगी एवं आई.पी.सी. के प्रावधानों के अन्तर्गत वसूली/दण्डात्मक कार्यवाही की जा सकेगी।
  4. भिक्षावृत्ति पर जीवन यापन करने वाले योजना के पात्र नहीं होंगे।
  5. यात्रा हेतु शारीरिक एवं मानसिक रूप से सक्षम हो और किसी संक्रामक रोग यथा टी0बी0, कांजेस्टिव कार्डियक, श्वांस में अवरोध संबंधी बीमारी, Coronary अपर्याप्तता,  Coronary thrombosis, मानसिक व्याधि, संक्रामक कुष्ठ आदि से ग्रसित न हो।
  6. वरिष्ठ नागरिक की चिकित्सा अधिकारी द्वारा इस आशय का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा की वह व्यक्ति प्रस्तावित दस दिवसीय यात्रा हेतु शारीरिक रूप से स्वस्थ एवं सक्षम है।
  7. केन्द्र सरकार/राज्य सरकार/केन्द्र व राज्य सरकार के उपक्रम/स्थानीय निकाय से सेवानिवृत्त कर्मचारी/अधिकारी एवं उनके जीवन साथी यात्रा के पात्र नहीं होगें।

नोटः- 

1.   यदि यह पाया गया कि आवेदक/यात्री ने असत्य जानकारी देकर या तथ्यों को छुपाकर आवेदन किया है तो उसे किसी भी समय योजना के लाभों से वंचित किया जा सकेगा।
2.   नियम 15 में वर्णित शर्तों के उल्लंघन पर भी आवेदक/ यात्री को योजना के लाभों से वंचित किया जा सकेगा।
3.   नियम 5(1) एवं (2) के अन्तर्गत निरर्ह व्यक्ति को भविष्य में आवेदन के लिये भी निरर्ह घोषित किया जा सकेगा।

राजस्थान दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा आवेदन की प्रक्रिया:

1.देवस्थान विभाग के पोर्टल पर दिये गये लिंक के माध्यम से केवल ऑनलाईन ही स्वीकार किए जाएंगे।


2.   आवेदक व उसके साथ जाने वाले सहायक दोनों के पास भामाशाह/आधार कार्ड अवश्य होना चाहिए।
3.   ऑनलाईन आवेदन व भामाशाह कार्ड हेतु संबंधित पोर्टल से फार्म भरा जा सकता है। ई-मित्र केन्द्र पर भी ये सुविधाएं उपलब्ध हैं।
4.   आवेदन पत्र में अपनी पसंद के तीन तीर्थ-स्थल वरीयता क्रम (Preference) में अंकित किया जाए।
5.   आवेदन के उपरांत उसकी प्रिंटेड प्रति सुविधा हेतु रख लें।
  नोटः- आवेदकों को सलाह दी जाती है कि आवेदन से पूर्व ही भामाशाह कार्ड हेतु पंजीयन की कार्यवाही पूर्ण कर लें। इससे आवेदक को फोटो व दस्तावेज अपलोड करने व अन्य विवरण भरने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

राजस्थान भामाशाह कार्ड योजना क्लिक करें और पढ़ें

आवेदन व पात्रता संबंधी अन्य मुख्य शर्तें

1.     आवेदक को आवेदन में किन्हीं दो नाम निर्देशितियों के नाम, मोबाईल नंबर एवं अन्य विशिष्टियों का विवरण भी देना होगा, जिनसे किसी आपात स्थिति में उनसे तुरन्त संपर्क किया जा सके।
2.     70 वर्ष या अधिक आयु के ऐसे व्यक्ति जिसने अकेले रेल यात्रा करने हेतु आवेदन किया है, को अपने साथ सहायक को यात्रा पर ले जाने की पात्रता होगी। सहायक का यात्री का संबंधी होना आवश्यक नही है। हवाई जहाज से यात्रा करने के इच्छुक व्यक्ति के साथ सहायक यात्रा पर जाने का पात्र नही होगा। पुरूष सहायक की आयु 21 वर्ष से 45 वर्ष तथा महिला सहायक की आयु 30 से 45 वर्ष होगी।
3.     पति/पत्नी के साथ-साथ यात्रा करने पर सहायक को साथ ले जाने की सुविधा नहीं रहेगी।
4.     आवेदक के जीवनसाथी की आयु 60 वर्ष से कम होगी, तब भी आवेदक के साथ यात्रा कर सकेगा/सकेगी।
5.     आवेदन करते समय ही आवेदक को यह बताना होगा कि उसका जीवन-साथी/सहायक भी उसके साथ यात्रा करने का इच्छुक है।
6.     सहायक को यात्रा पर ले जाने की दशा में उसे भी उसी प्रकार की सुविधा प्राप्त होगी, जो कि यात्री को अनुज्ञेय है।
7.     यात्रियों का चयन जिला मुख्यालय पर जिला कलक्टर द्वारा लाटरी द्वारा किया जाएगा। चयनित यात्रियों की सूची जिला मुख्यालय एवं उपखण्ड मुख्यालय तथा देवस्थान विभाग के वेबसाईट पर प्रदर्शित की जाएगी।
8.     चयनित यात्री को यात्रा से पूर्व स्वास्थ्य संबंधी निर्धारित चिकित्सकीय प्रमाण पत्र प्राप्त कर लेना होगा।
9.     चयन के उपरान्त यदि किसी कारणवश आवेदक तीर्थयात्रा नहीं करता, तो उसे विभाग द्वारा निर्धारित हेल्पलाईन पर समय से पूर्व सूचना देनी आवश्यक होगी, अन्यथा उसे भविष्य में इस योजना हेतु पात्र नहीं माना जायेगा।

दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा राजस्थान चयन की प्रक्रिया:-

1.     यात्रियों का चयन जिला स्तर पर गठित समिति द्वारा निम्न लिखित प्रक्रिया के अन्तर्गत किया जाएगा-
2.     प्रत्येक स्थान की यात्रा हेतु प्राप्त आवेदनों में से उपलब्ध कोटे के अनुसार यात्रियों का चयन किया जायेगा। यदि निर्धारित कोटे से अधिक संख्या में आवेदन प्राप्त होते हैं, तो लाटरी (कम्प्यूटराईज्ड ड्रा आफ लाट्स) द्वारा यात्रियों का चयन किया जायेगा। कोटे के 100 प्रतिशत अतिरिक्त व्यक्तियों की प्रतीक्षा सूची भी बनायी जायेगी।
3.     चयनित यात्री के यात्रा पर न जाने की स्थिति में प्रतीक्षा सूची में सम्मिलित व्यक्ति को यात्रा पर भेजा जा सकेगा।
4.     लाटरी निकालते समय आवेदक के साथ उसकी पत्नी अथवा पति या सहायक को एक मानते हुऐ लाटरी निकाली जायेगी एवं लाटरी में चयन होने पर यात्रा के लिये उपलब्ध बर्थ/सीटों में से उतनी संख्या कम कर दी जायेगी।
5.     चयनित यात्रियों एवं प्रतीक्षा सूची को कलक्टर कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर एवं अन्य ऐसे माध्यम से हो कि उचित समझे प्रसारित किया जायेगा।
6.     केवल वह व्यक्ति ही जिसका चयन किया गया है, यात्रा पर जा सकेगा। वह अपने साथ अन्य किसी व्यक्ति को नहीं ले जा सकेगा।
7.   रेल एवं हवाई यात्रियों की लाटरी एक साथ निकाली जायेगी, उसके उपरान्त 15000 हजार यात्रियों का चयन रेल यात्रा हेतु व 5000 हजार यात्रियों का चयन हवाई यात्रा हेतु किया जायेगा।

दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा  राजस्थान यात्रा की प्रक्रिया:-

1.     जिला कलक्टर द्वारा चयनित यात्रियों की सूची सरकार द्वारा निर्धारित ऐजेन्सी को सौंपी जायेगी।
2.     निर्धारित ऐजेन्सी यात्रियों के समूह को यात्रा पर ले जाने की व्यवस्था करेगी।
3.     यात्रियों के यात्रा व्यय एवं उन्हें उपलब्ध कराये जाने वाली सुविधाओं का विनिष्चय सरकार द्वारा किया जायेगा।
4.     यात्रियों के साथ अनुरक्षक(एस्कार्ट) के रूप में देवस्थान विभाग, राजस्व, पर्यटन विभाग के राजकीय अधिकारियों/ कर्मचारियों को भेजा जायेगा। इन विभागों के कर्मचारियों के उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में अन्य विभागों एवं राजकीय निगम/ मण्डल/ आयोग के अधिकारियों के उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में अन्य विभागों एवं राजकीय निगम/मण्डल/आयोग के अधिकारियों /कर्मचारियों को भी भेजा जा सकेगा। उक्त व्यवस्था पर होने वाला व्यय राज्य सरकार वहन करेगी।
5.     यात्रियों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्था जिला स्तरीय गठित समिति द्वारा सुनिश्चित की जावेगी।
6,    एक बार यात्रा शुरू करने पर यात्री यदि बीच में यात्रा छोड़ना चाहेगा तो उसे ऐसी सुविधा सरकार की ओर से नहीं दी जावेगी।

  1. हवाई यात्रा में चयन होने पर यात्रियो को नजदीकी एयरपोर्ट तक हवाई जहाज द्वारा वहां से तीर्थ स्थान तक बस द्वारा यात्रा करवाई जावेगी।

यात्रियों के समूह:-

यात्रा केवल सामूहिक रूप से आयोजित की जायेगी। उक्त समूहों का निर्धारण राज्य सरकार अथवा सरकार द्वारा अधिकृत प्राधिकारी/ऐजेन्सी द्वारा किया जायेगा। किसी तीर्थ स्थान की यात्रा के लिए सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम संख्या में यात्री उपलब्ध होने पर ही यात्रा प्रारंभ की जायेगी। योजना के अन्तर्गत चयन होने मात्र से ही किसी व्यक्ति को यात्रा कराने हेतु राज्य सरकार बाध्य नहीं होगी।

अन्य व्यक्तियों के यात्रा करने पर प्रतिबन्ध:

केवल वह व्यक्ति ही जिसका चयन इस योजना के अन्तर्गत यात्रा हेतु किया गया है, इस यात्रा पर जा सकेगा। वह अपने साथ अन्य किसी व्यक्ति को, भले ही वह यात्रा का व्यय देने हेतु तैयार हो, यात्रा में साथ नहीं ले जा सकेगा। ट्रेन एवं वाहनों में केवल चयनित व्यक्ति ही यात्रा करेगा और एक सीट/बर्थ पर केवल एक ही व्यक्ति यात्रा करेगा।

अतिरिक्त व्यय के संबंध में:-

यदि कोई यात्री, यात्रा के दौरान सरकार द्वारा निर्धारित मापदण्डों/ सुविधाओं के अतिरिक्त सुविधायें प्राप्त करना चाहता है तो उसका भुगतान उसे स्वयं करना होगा।

यात्रा के दौरान अपेक्षाएँ:-

1.   यात्री किसी तरह के ज्वलनशील पदार्थ या मादक पदार्थ किसी भी रूप में साथ नहीं ले जा सकेंगे।
2.   यात्री अपने साथ कोई मूल्यवान वस्तु तथा आभूषण आदि भी नहीं ले जा सकेंगे।
3.   यात्री तीर्थ की मर्यादा के अनुसार आचरण करेंगे, ताकि प्रदेश की छवि अन्यथा प्रभावित न हों।
4.   यात्री अपने निर्धारित सम्पर्क अधिकारी के निर्देश का पालन करेंगे।
5.   यात्रियों द्वारा उपरोक्त आचार संहिता के पालन करने संबंधी आशय का षपथ पत्र दिया जायेगा।

यात्रा के दौरान अप्रत्याशित परिस्थितिया:-

यात्रा के दौरान होने वाली किसी दुर्घटना अथवा कठिनाई के लिये राज्य शासन अथवा उसका कोई अधिकारी/ कर्मचारी उत्तरदायी नहीं होगा।

योजना का व्यय:-

योजना के क्रियान्वयन हेतु व्यय (बजट सीमा तक) जिसमें यात्रा व्यय, अन्य प्रशासनिक व्यय तथा परिवहन, दूरभाष, विज्ञापन, प्रचार-प्रसार, व्यवसायिक एवं परामर्श सेवायें प्राप्त करना, सत्कार व्यय तथा यात्री बीमा व्यय आदि सम्मिलित हैं, करने के लिये प्रमुख शासन सचिव, देवस्थान/ आयुक्त, देवस्थान विभाग सक्षम होंगे।

संचालक:-

योजना के दिन प्रतिदिन संचालन/ मोनिटरिंग हेतु एक अधिकारी की नियुक्ति की जावेगी। उसको आवश्यकतानुसार वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियां देवस्थान विभाग द्वारा प्रत्यायोजित की जा सकेगी।

इन नियमों में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो- 
(क) ’’तीर्थ स्थान‘‘ से तात्पर्य उस स्थान/स्थानों से है जो कि देवस्थान विभाग द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट किये जायें।
(ख) ’’यात्रा‘‘ से तात्पर्य नियम 3 (क) में उल्लेखित स्थान की यात्रा एवं उक्त स्थान की यात्रा के लिये की गई अनुषांगिक यात्राओं से है।
(ग) ’’यात्री‘‘ से तात्पर्य उस व्यक्ति/व्यक्तियों के समूह से है जो नियम 3 (क) में उल्लेखित स्थान/ स्थानों की यात्रा प्रारंभ करता है।
(घ) ’’आवेदक‘‘ से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति/ व्यक्तियों के समूह से है जो कि नियम 3(क) में उल्लेखित स्थान की यात्रा करने हेतु आवेदन प्रस्तुत करता है।
(ड) ’’सहायक‘‘ से तात्पर्य उस पुरुष/महिला से है जो कि 70 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के आवेदक के साथ यात्रा पर जाता है। पुरुष सहायक की पात्रता 21 से 45 वर्ष एवं महिला सहायक की पात्रता 30 से 45 वर्ष होगी।
(च) ’’कोटा‘‘ से तात्पर्य यात्रियों की उस संख्या से है जो राज्य सरकार/ देवस्थान विभाग राज्य, जिला अथवा अन्य प्रकार से निर्धारित करें।
(छ) ’’ऐजेन्सी‘‘ से तात्पर्य उस संस्था अथवा संगठन से है जिसका चयन राज्य सरकार इस नियम के अन्तर्गत यात्राएँ आयोजित करने हेतु करे। प्रथमतः आई.आर.सी.टी.सी. के पैकेज के अनुसार यात्रियों को भेजा जाएगा। किसी तीर्थ के लिये चयनित आवेदको की संख्या कम रहने पर बस की व्यवस्था भी की जा सकेगी।
(ज) ’’संचालक‘‘ से तात्पर्य उस अधिकारी से है जिसे योजना के संचालन हेतु देवस्थान विभाग द्वारा अधिकृत किया जावे।
(झ) ’’जीवन साथी‘‘ से तात्पर्य यात्री की पुरुष अथवा पति से है।
(ञ) ’’अनुरक्षक (एस्कार्ट)‘‘ से तात्पर्य उस अधिकारी / कर्मचारी अथवा व्यक्ति से है जो आवेदक/ आवेदकों के साथ राज्य सरकार की ओर से यात्रा पर भेजा जाएगा।

तीर्थयात्रा योजना हेतु राज्य स्तर पर प्रबंध व्यवस्था:

विभिन्न तीर्थ स्थानों की यात्रा हेतु यात्रियों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य स्तर पर देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार समुचित व्यवस्थाऐं सुनिश्चित करेगा।
1. इस हेतु देवस्थान मंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तर पर वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा समिति का गठन किया जायेगा।
2. उक्त समिति में निम्नानुसार सदस्य होंगे-

I देवस्थान मंत्री अध्यक्ष
II राज्य मंत्री/उपमंत्री सह अध्यक्ष
III अतिरिक्त मुख्य सचिव, देवस्थान विभाग सदस्य
IV अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह विभाग सदस्य
V प्रमुख शासन सचिव, पर्यटन सदस्य
VI प्रमुख शासन सचिव, अल्प संख्यक मामलात् सदस्य
VII प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सदस्य
VIII आयुक्त, देवस्थान विभाग सदस्य-सचिव

समिति के किसी सदस्य की अनुपस्थिति के कारण समिति की कार्यवाही को प्रश्नगत नहीं किया जायेगा।

तीर्थयात्रा योजना हेतु देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार के कर्तव्यः

1-राज्य सरकार निम्नलिखित कर्तव्यों का निर्वहन करेगीः-

वरिष्ठ नागरिकों की यात्राओं के लिये आवश्यक और उपयोगी जानकारी का संग्रहण एवं प्रचार-प्रसार।
यात्रियों की शिकायतों/ समस्याओं को स्थानीय अधिकारियों के ध्यान में लाकर उनका निराकरण करना।
यात्रियों की सुविधा के उद्देश्य से अन्य आवश्यक कार्य करना एवं सुझाव देना।
अन्य कार्य जो समय-समय पर सरकार द्वारा सौंपे जाये।

2-समिति अपने कर्तव्यों की पूर्ति के लिये समय-समय पर उप समितियाँ बना सकेगी।

तीर्थयात्रा योजना हेतु जिला स्तर परप्रबंध समिति:-

वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना हेतु जिला स्तर पर चयन एवं समुचित प्रबंध व्यवस्था समिति प्रभारी मंत्री/शासन सचिव की अध्यक्षता में राज्य सरकार गठित करेगी जिसमें जिला स्तर के निम्न सदस्य सम्मिलित होंगे-

1. प्रभारी मंत्री/शासन सचिव अध्यक्ष
2. जिला कलक्टर सदस्य
3. पुलिस आयुक्त/अधीक्षक सदस्य
4. मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद सदस्य-सचिव
5. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सदस्य
6. उपनिदेशक, पर्यटन विभाग सदस्य
7. सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग सदस्य

जिले के प्रभारी मंत्री/शासन सचिव की अनुपस्थिति में कलक्टर, समिति की बैठकों की अध्यक्षता करेंगे।
समिति के किसी सदस्य की अनुपस्थिति के कारण समिति की कार्यवाही को प्रश्नगत नहीं किया जायेगा।

तीर्थयात्रा योजना हेतु जिला स्तर पर प्रबंध समिति के कर्तव्यः-

1- जिला स्तरीय प्रबंध समिति निम्नलिखित कर्तव्यों का निर्वहन करेगीः-
(क) यात्रियों का चयन इसी समिति द्वारा किया जाएगा।
(ख) वरिष्ठ नागरिकों की यात्राओं के लिये आवश्यक उपयोगी जानकारी का संग्रहण एवं प्रचार- प्रसार।
(ग) यात्रियों की शिकायतों/समस्याओं को स्थानीय अधिकारियों के ध्यान में लाकर उनका निराकरण करना।
(घ) यात्रियों की सुविधा के उद्देश्य से अन्य आवश्यक कार्य करना एवं सुझाव देना।
(ण) अन्य कार्य जो समय-समय पर सरकार द्वारा सौंपे जावें।
2- समिति अपने कर्तव्यों की पूर्ति हेतु समय समय पर उप-समितियाँ बना सकेगी

उपरोक्त वर्णित नियमों में प्रावधान होते हुऐ भी योजना के क्रियान्वयन हेतु संसाधनों की उपलब्धता सुलभ कराने एवं प्रशासनिक निर्णय, जिमें वित्तीय व्यय (बजट प्रावधान की सीमा तक) भी सम्मिलित हैं के लिये आयुक्त देवस्थान विभाग अधिकृत होंगे।

उक्त विवरण केवल सरल संकेतक है। योजना संबंधी अन्य शर्तों, प्रावधानों के लिये मूल विभागीय आदेश व परिपत्रों का अवलोकन करें। विभाग द्वारा नियमों के अध्यधीन उपनियम बनाए जा सकेंगे।
योजना संबंधी किसी भी बिन्दु पर समस्या समाधान आयुक्त कार्यालय देवस्थान विभाग, उदयपुर से किया जा सकेगा। इस योजना के किसी भी दिशा निर्देश, आदेश की व्याख्या के लिये देवस्थान विभाग राजस्थान सरकार का विनिश्चय अन्तिम होगा।

तीर्थ स्थानों के प्राथमिकता वाइज रिपोर्ट

दोस्तों यदि योजना से संबंधित कोई भी प्रश्न पूछना चाहते हैं तो मुझे कमेंट करें मैं आपके प्रश्नों का जवाब जरुर दूंगा कृपया मेरे फेसबुक पेज को लाइक और शेयर करना ना भूले

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5 comments

  1. महेश कुमार

    राजस्थान पंडित दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा हेतु आवेदन कब करें।

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