बकरी पालन योजना| लोन||फॉर्म|Bakri palan yojana in hindi



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दोस्तों 😀 !!!!!!!! 😀 आज हम आपको अपनी वेबसाइट पर एक नई योजना को लेकर आए हैं जिस योजना का नाम है बकरी पालन योजना जी हां दोस्तों ध्यान से पढ़िए योजना का नाम है बकरी पालन योजना बहुत से ऐसे लोग हैं जो बकरी पालन योजना से अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं परंतु उनको समझ में नहीं आता है हम बकरी पालन का व्यवसाय किस प्रकार से शुरू करें?

दोस्तों बकरी पालन योजना/goat farming loan in hindi में बहुत सारा पैसा है जो कि आप कमा सकते हैं परंतु यह पैसा हम किस प्रकार से कम आएंगे तथा बकरी पालन किस प्रकार से करेंगे ताकि हम भी अपना अच्छा गुजर बसर कर सकें इसके लिए हम आपको पूरी जानकारी अपने इस आर्टिकल में देने जा रहे हैं कि आप किस प्रकार से बकरी पालन योजना शुरू कर सकते हैं और पैसा कमा सकते हैं दोस्तों इसकी पूरी जानकारी हमारे इस आर्टिकल में ध्यानपूर्वक पढ़ें!!!!!!!!!!!!

दोस्तों यदि आप अपने बकरी पालन व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले बहुत ही बातों का ध्यान रखना होगा कि हम किस प्रकार की बकरियों को पालेंगे बकरियों का रहने का स्थान किस प्रकार का होना चाहिए या फिर अन्य और कई बातें तो चलिए दोस्तों किस प्रकार से हम बकरी पालन शुरू करेंगे इसकी पूरी जानकारी को नीचे पढ़ें!!!!!!!!

बकरी पालन कैसे करें /bakri palan loan

दोस्तों सबसे पहले हमारे दिमाग में यही प्रश्न आएगा कि हम बकरी पालन किस प्रकार से शुरू करेंगे दोस्तों हम आपको बताना चाहते हैं!!!!!!!!!!!!!

बकरी के शेड बनाने के लिए सही जगह का चुनाव करें-

दोस्तों हम आपको बताना चाहते हैं कि यदि आप बकरी पालन शुरू करना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको एक सही जगह का चुनाव करना होगा यानी कि जहां पर बकरी आसानी पूर्वक रह सके तथा घास क्षेत्र अच्छा हो!!!!!!उसके लिए अलग से बाड़ा बनाने की आवश्यकता पड़ती है। इसके लिए अच्छी जगह होनी चाहिए!!!!!!!!!!!!!

बकरी के सही नसल का चुनाव करें-

बकरियों के सही नस्ल का चुनाव करें । ध्यान रहे दोस्तोँ के बकरी के सही नसल का चुनाव ही आपको बकरी पालन में सफलता की ऊंचाइयों तक ले जायेगा । सही नसल के चुनाव के लिए हमें एक बात ध्यान में रखनी है के हम जिस वातावरण में रहते हैं वहां के अनुकूल ही बकरियों का नसल का चयन करें |अगर हम बिहार की बात करें तो यहाँ ब्लैक बंगाल बकरी और बीटल बकरा का चयन सबसे अच्छा चयन है!!!!!!!!!!!

इसी तरह हम आपको अलग-अलग जातियों की नस्लों के बारे में बता रहे हैं जिनका बकरी पालन आप कर सकते हैं!!!!!!!!!!!

राजस्थान में सिरोही , बीटल ,सोजात

UP में बारबरी और जमुनापारी

दक्षिण भारत में ओस्मनाबादी, तेल्लीचेर्री

पश्चिम बंगाल में ब्लैक बंगाल इत्यादि प्रमुख नस्लें हैं

20 ब्लैक बंगाल बकरी में एक बीटल बकरा रखें । यह नस्लें बिहार , झारखण्ड और पश्चिम बंगाल के वातावरण के अनुकूल हैं और बीमार भी कम पड़ते हैं । सरकार बकरी पालन अथवा गाय पालन की नयी नयी योजनाए भी चला रही है । आप अपने नज़दीकी पशु पालन विभाग या बाएफ में जाकर बकरी पालन लोन के लिए बकरी पालन फॉर्म भी भर सकते हैं

बकरी खरीदने समय हम यह ध्यान दें की बकरी वयस्क हो सबसे अच्छा तो यह है की उन बकरियों को ख़रीदे जिसका एक ब्याँत यानि वो एक बार बच्चा दे चुकी हो इससे हमें बाँझ बकरियों का खतरा नहीं रहता अन्यथा फार्म का प्रोडक्शन जल्दी होता है!!!!!!!!!

प्रजनन क्षमता

एक बकरी लगभग डेढ़ वर्ष की अवस्था में बच्चा देने की स्थिति में आ जाती है| और 6-7 माह में बच्चा देती है।  एक बकरी एक बार में दो से तीन बच्चा देती है| और एक साल में दो बार बच्चा देने से इनकी संख्या में वृद्धि होती है। बच्चे को एक वर्ष तक पालने के बाद ही बेचते हैं। 
 

बकरियों में प्रमुख रोग

देशी बकरियों में मुख्यतः मुंहपका, खुरपका, पेट के कीड़ों के साथ-साथ खुजली की बीमारियाँ होती हैं। ये बीमारियाँ प्रायः बरसात के मौसम में होती हैं। 
 

उपचार

बकरियों में रोग का प्रसार आसानी से और तेजी से होता है। अतः रोग के लक्षण दिखते ही इन्हें तुरंत पशु डाक्टर से दिखाना चाहिए। कभी-कभी देशी उपचार से भी रोग ठीक हो जाते हैं।

भेड़ एवं बकरी पालन के लिए ऋण

भेड़ एवं बकरी पालन कृषि का अनुपूरक कार्यकलाप है. यह कार्यकलाप स्वतंत्र रूप से किए जाने पर भी व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य है|आईडीबीआई बैंक 50,000/- रुपए से 50 लाख रुपए तक के आवधिक ऋण उन व्यक्तियों / समूह / गडेरिया कोऑपरेटिव सोसाइटी / संघ/ लिमिटेड कंपनियों को प्रदान करता है जो इस कार्यकलाप में अनुभवी और सक्रिय रूप से कार्यरत है.  

बकरियों को चारा कैसा दें

  • बकरी पालन में हम मुख्य रूप से बकरियों के मांस और दूध बेच कर ही पैसे कमाते हैं जो की पूर्णयता इसके खोराक और चारे पर निर्भर करती है यदि हम सही चारा देंगे तो बकरी का विकास अच्छा होगा और हमें दाम भी अच्छे मिलेंगे । सही चारे से प्रजनन क्षमता भी बढ़ती है ।
  •  बकरी पालन का मुख्या लागत बकरी के चारे में ही खर्च होता है हमें यह चाहिए के हम चारे में जितना पैसा बचा सकें उतना अच्छा है |
  • हम बकरी के लिए चारा स्वयं पैदा करें ।
  • हो सके तो एक एकड़ जमीन में हम मक्का , बरसीम इत्यादि रोप कर हरी चारा का बंदोबस्त कर दें |
  • इससे हम चारा में बहुत पैसा बचा सकते हैं और बकरियों को आहार भी पौष्टिक मिलता है ।
  • दो तरह के चारे हम बकरियों को जरूर दें |

एक हरा चारा और दूसरा सूखा चारा हरा चारा में तो पत्ते,घांस , बरसीम , मक्का इत्यादि अवश्य दें और सूखे चारे के रूप में  हम 100 kg सूखा चारा बना के रख लें!!!!!!!!!!!!!!!!!

मकई का दर्रा – 30 kg

गेहू का चोकर – 40  kg

खल्ली (मूंग फली ) – 10  kg

चने का छिलका – 15 kg

मिनरल मिक्सचर पाउडर – 4 kg

नमक – 1  kg

 

  • यह चारा बकरियों को दिन में सुबह शाम कुट्टी यानि कटे हुए पोवाल में मिला कर दें |
  • एक बकरी के चारे का औसत एक पाओ (२५० ग्राम ) कुटटी में 300 ग्राम यह सूखा चारा मिला कर थोड़ा पानी दे और खाने दें इससे बकरियों का विकास बहुत अच्छा होगा |
  • दिन में हरा चारा दें  7 से 8 महीने के भीतर बकरे का वजन 25 -30 kg  का हो जाता है यह वजन आपके बकरियों के नसल पर भी निर्भर करता है ।

बकरियों का टीकाकरण और डीवॉर्मिंग 

  • बकरियों को शेड के अंदर डालते ही टीकाकरण और डीवॉर्मिंग जरूर करवा दें|
  • फुट एंड माउथ डिजीज (FMD, PPR  , CCPP और एन्टेरोटोक्सिमिआ का टीका एक बार जरूर लगवा दें|
  • इससे इनमे प्रमुख रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है और यह बीमार भी कम पड़ते हैं ।
  • प्रत्येक 3  माह में एक बार  डीवॉर्मिंग जरूर करें, |
  • अल्बेंडाजोल टेबलेट या इसके अल्टरनेटिव टेबलेट्स बाजार में उपलब्ध है |
  • डॉक्टर की सलाह से अपने पशुओं को दें  ।
  • पेट का कीड़ा मारने से इनमें विकास तेज़ी से होता है और यह स्वस्थ भी रहते हैं|

बकरी पालन के लिए सावधानियां

  • आबादी क्षेत्र जंगल से सटे होने के कारण जंगली जानवरों का भय बना रहता है|क्योंकि बकरी जिस जगह पर रहती है, वहां उसकी महक आती है और उस महक को सूंघकर जंगली जानवर गांव की तरफ आने लगते हैं।
  • बकरी के छोटे बच्चों को कुत्तों से बचाकर रखना पड़ता है।
  • बकरी एक ऐसा जानवर है, जो फ़सलों को अधिक नुकसान पहुँचाती है।
     

बकरी पालन में समस्याएं

  •  बकरी गरीब की गाय होती है, फिर भी इसके पालन में कई दिक्कतें भी आती हैं – 
  • बरसात के मौसम में बकरी की देख-भाल करना सबसे कठिन होता है।
  • क्योंकि बकरी गीले स्थान पर बैठती नहीं है और उसी समय इनमें रोग भी बहुत अधिक होता है।
  • बकरी का दूध पौष्टिक होने के बावजूद उसमें महक आने के कारण कोई उसे खरीदना नहीं चाहता। इसलिए उसका कोई मूल्य नहीं मिल पाता है। 
  • बकरी को रोज़ाना चराने के लिए ले जाना पड़ता है।
  • इसलिए एक व्यक्ति को उसी की देख-रेख के लिए रहना पड़ता है। 

बकरी पालन योजना के लाभ

  • सूखा प्रभावित क्षेत्र में खेती के साथ आसानी से किया जा सकने वाला यह एक कम लागत का अच्छा व्यवसाय है|
  • जरूरत के समय बकरियों को बेचकर आसानी से नकद पैसा प्राप्त किया जा सकता है। 
  • इस व्यवसाय को करने के लिए किसी प्रकार के तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं पड़ती।
  • यह व्यवसाय बहुत तेजी से फैलता है।
  • इसलिए यह व्यवसाय कम लागत में अधिक मुनाफा देना वाला है। 
  • इनके लिए बाजार स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध है।

अधिकतर व्यवसायी गांव से ही आकर बकरी-बकरे को खरीदकर ले जाते हैं। 

किसान को बकरी पालन लोन कैसे मिलेगा

  • सबसे पहले किसान को किसी भी राष्ट्रीय बैंक में एक करंट एकाउंट होना चाहिए |
  • यह एकाउंट करीब एक साल पुराना तथा एकाउंट बकरी पालन के किसी नाम से  होना चाहिए |
  • उस एकाउंट में बकरी के खरीद बिक्री का कम से कम एक साल का लेनदेन होना चाहिए |
  • अगर एक साल का रिटर्न फाइल है तो अच्छा है |
  • इस के बाद आप बैंक में जाएँ तो बैंक अधिकारी आप को आपके बैंक के लेनदेन के आधार पर आप को उतना पैसा आवंटित करेगा |
  • नाबार्ड कहता है की न्यू कमर्स को लोंन देगा लेकिन राष्ट्रीय बैंक न्यू कामर्स को नहीं देता है |
  • इस लिए राष्ट्रीय बैंक करता है की बैंक का पैसा डूब नही जाये |
  • यानि नाबार्ड का न्यू कामर्स का मतलब ही यही होता है की पहले आप अपने पैसे से बकरी पालन करे उसके बाद बैंक में जाकर लोंन की अप्लाई करें |

किसान बकरी पालन लोन form

General_Loan_Application_Form

भेड एवं बकरी पालन पर सरकार द्वारा दी जानें वाली सहायता 

योजना लागत एवं ब्याज मुक्त ऋण :

क्र-सं-उद्येश्यकुल वित्तीय परिव्यय
राशि लाखों में
ब्याज मुक्त ऋण राशि
1.भेड-बकरी पालन (40+2)1.00योजना लागत की 50 प्रतिशत राशि – अधिकतम रुपये 50,000/

वित्तीय व्यवस्था:-

योजनान्तर्गत कुल लागत का निम्नानुसार निवेश किया जायेगा :-

1-कृषक अंशदान10 प्रतिशत
2-ब्याज मुक्त ऋण राशि50 प्रतिशत
3-बैंक ऋण राशि40 प्रतिशत

पात्रता :

 व्यक्तिगत कृषक जिन्हें भेड एवं बकरी पालन का समुचित अनुभव हों। महिला, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के पालकों को प्राथमिकता दी जायेगी।

ऋण पुर्नभुगतान एवं ऋण वसूली :

  • योजनान्तर्गत देय ऋण की पुर्नभुगतान अवधि 9 वर्ष है जिसमें अनुग्रह अवधि के 2 वर्ष भी सम्मिलित है। प्रार्थी को देय ऋण एवं ब्याज मुक्त राशि की एक साथ वसूली करनी आवश्यक है|
  • अर्द्धवार्षिक किश्तों के रुप में ब्याज मुक्त राशि वर्ष में दो बार आनुपातिक आधार पर नाबार्ड को वापस करनी होगी।
  • सुविधा के लिये आप योजनान्तर्गत मासिक वसूली निर्धारित करें तथा जनवरी से जून तक की गई वसूली माह जुलाई में तथा जुलाई से दिसम्बर तक की गई वसूली जनवरी में नाबार्ड को वापस भिजवाने हेतु राज्य बैंक को भिजवायें।
  • बैंक को समुचित ऋण ़ऋण एवं ब्याज मुक्त राशि की वसूली हेतु सुनिश्चित व्यवस्था व प्रयास करने चाहिये।
    बैंक को वार्षिक आधार पर योजनान्तर्गत वित्त पोषित इकाईयों का विवरण एनेक्सर- III में आवश्यक रुप से भिजवाना होगा।

दोस्तों यदि आप बकरी पालन योजना से संबंधित कोई भी और जानकारी पूछना चाहते हैं तो मुझे कमेंट करें मैं आपके प्रश्नों का जवाब जरूर दूंगी कृपया मेरे फेसबुक पेज को लाइक और शेयर करना ना भूलें!!!!!!!!!!!!


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