मुख्यमंत्री प्रवासी मजदूर सहायता योजना मध्य प्रदेश | 1000 रुपये


कोरोना वायरस की वजह से देश भर में लोगों को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। देश के हर राज्य की सरकारे अपने नागरिकों के लिए बहुत से कदम उठा रही हैं। इसी ओर अब मध्यप्रदेश सरकार ने भी एक अहम कदम उठाया है। मध्यप्रदेश से बाहर फंसे हुए मजदूरों को आर्थिक और खाद्य सामग्री मुहैया कराई जाए इसके लिए सरकार ने मुख्यमंत्री प्रवासी मजदूर सहायता योजना मध्यप्रदेश की शुरूआत की गई है। इस योजना के तहत मध्यप्रदेश के जो भी लोग किसी अन्य राज्य में फंसे हुए हैं, उन्हे 1000 रूपए की मदद मुहैया कराई जाएगी। मुख्यमंत्री प्रवासी सहायता योजना के और भी बहुत से फायदे हैं, इन्हे समझने और इस योजना का लाभ उठाने के लिए आपको हमारे इस लेख को अंत तक पढ़ना होगा।

क्या है मुख्यमंत्री प्रवासी मजदूर सहायता योजना

आपको बता दें देश में कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन 3 मई तक बढ़ा दिया गया है, ऐसे में मध्यप्रदेश के ऐसे बहुत से मजदूर हैं,जो अन्य राज्यो में फंसे हुए हैं और उनके पास खाने पीने की कोई व्यवस्था नहीं है, इसलिए मुख्यमंत्री प्रवासी मजदूर सहायता योजना का ऐलान किया गया है। योजना का ऐलान 15 अप्रैल 2021 को किया गया था। योजना के तहत प्रदेश के मजदूरो को 1000-1000 रूपए की आर्थिक मदद पंहुचाई जाएगी, जिसके जरिए वह अपने खाने पीने और अन्य जरूरी वस्तुओं को जूटा पाएं।

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मुख्यमंत्री प्रवासी मजदूर सहायता योजना मध्यप्रदेश 2021, का संचालन

मुख्यमंत्री प्रवासी मजदूर सहायता योजना का संचालन प्रदेश के कलेक्टरों, मेप आईटी विभाग और राहत आयुक्त द्वारा किया जाएगा। योजना को कामयाब बनाने के लिए अलग अलग चरण पर बहुत ही सुलझे हुए तरीके से काम किया जाएगा। इसमें सबसे अहम रोल जिला कलक्टरो और मेप आईटी विभाग का होगा।

प्रवासी मजदूर सहायता योजना इस तरह करेगी काम

  1. सबसे पहले मेप आईटी द्वारा यह चेक किया जाएगा की ऐसे कितने मोबइल नंबर है जो हैं तो एमपी के लेकिन उनकी लोकेशन राज्य के बाहर की है।
  2. इसके बाद इन नंबरो की सूची को जिले के हिसाब से अलग अलग किया जाएगा।
  3. अब बनाई गई सूची पर जिले के कलेक्टरों के माध्यम से राज्य के बाहर फंसे हुए मजदूरों को कॉल किया जाएगा और उनसे उनकी कुछ जानकारी पूछी जाएंगी। जिनमे उनका नाम, पिता का नाम, वह मध्य प्रदेश में कंहा के निवासी हैं वह पता, मोबइल नंबर, आधार नंबर समग्र आईडी और बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज मांगे जाएंगे। इसके अलावा जिला कलेक्टरों के का्र्यालय द्वारा उनके कार्य से संबंधित सवाल पुछे जाएंगे, साथ ही वह अभी कंहा फंसे यह जानकारी भी देनी होगी।
  4. अगर प्रदेश के किसी निवासी के पास दस्तावेजो का अभाव पाया जाता है, खासतौर से अगर आधार कार्ड और समग्र आईडी नहीं होती तो ऐसे में अलग अलग तरीको के इस्तेमाल से मध्यप्रदेश के मूल निवासी होने की नागरिकता को साबित किया जा सकता है। इसमें वह अपने मनरेगा कार्ड वोटर आईडी कार्ड, खाद्ययान्न पर्ची जैसे दस्तावेजो का इस्तेमाल कर सकता है। इसके लिए यह दस्तावेज उसे व्हॉट्सएप या अन्य किसी ऑनलाइन माध्यम से भेजे जा सकेंगे।
  5. अगर एमपी निवासी के साथ कोई अन्य लोग भी राज्य के बाहर फंसे हैं तो वह उनकी जानकारी भी व्हाट्सएप के जरिए कलेक्टर कार्यालय के कर्मियों को दे सकता है इस तरह उन लोगों तक भी मदद पंहुचाई जा सकेगी।
  6. जानकारी पूरी तरह प्राप्त होने के बाद सब कुछ सुनिश्चित किया जाएगा, इसके बाद ही राहत आयुक्त के माध्यम से लोगों के खातों में या पेटीएम और फोन पे के माध्यम से पैसा भेज दिया जाएगा।
  7. योजना में किसी तरह की कोई चूक न हो, या फिर योजा का लाभ हर पीडि़त व्यक्ति तक पंहुचे इसकी जिम्मेदारी भी जिला कलेक्टरों की होगी।
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योजना की पात्रता एंव आवदे प्रक्रिया

योजना का लाभ मध्यप्रदेश के उन मूल निवासियों को ही प्राप्त होगा जो कोरोना वायरस के चलते देश के अलग अलग हिस्सों में अब तक फंसे हुए हैं। योजना का लाभ हर व्यक्ति तक पंहुचाने के लिए मेप आईटी द्वारा ही राज्यों के बाहर मौजूद नंबरों की सूची बनाई जा रही है। अगर कोई व्यक्ति आवेदन करना चाहता है तो वह मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सकता है।

  • हेल्पलाइन नंबर- 181

योजना का लाभ लेने के लिए यह बेहद जरूरी होगा की अपने खातों एंव दस्तावेजों की सही जानकारी मुहैया कराई जाए। अगर कोई भी जानकारी गलत पाई गई तो योजना का लाभ नहीं उठा पाएंगे। साथ ही मजदूरों को यह भी साबित करना होगा कि वह राज्य से सच में बाहर हैं, इसके लिए नेटवर्क टावर और फोन की लोकेशन देखी जाएगी।

योजना के कुछ दिनों में ही 15 हजार लोगों की सूची हुई तैयार

योजना के ऐलान के बाद से ही इसे कामयाब बनाने के लिए राज्य के सभी कलेक्टर एंव योजना में कार्य करने वाले लोग जोरो शोरो से इसकी तैयारी में लग गए हैं, और महज योजना के कुछ ही दिन के भीतर 15 हजार लाभार्थियों की सूची तैयार कर ली गई है। साथ ही बचे हुए मजदूरों को सहायता पंहुचाने के लिए भी काम चल रहा है।